बचपन की बातें
वो हँसी खेल मुस्कान ,
होना हर गम से अनजान ।
न कोई गम न कोई सपनें ,
मालूम न था कौन है पराये और कौन है अपने ?
खेल में कभी होती हार तो कभी होती जीत ।
कभी होता झगड़ा तो कभी गाते हम मीठे गीत ॥
थोड़ी -सी लड़ाई , थोड़ी सी बातें ,
कितनी अच्छी लगती थी सखियों से मुलाकातें ।
आँखे भर आती हैं मेरी ।
जब याद आती हैं वे बचपन की बातें । ।
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